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बुलाती है मगर जाने का नहीं शायरी डाउनलोड

बलत ह मगर जन क नई व दनय ह उधर जन क नई. सरहद पर बहत तनव ह कय कछ पत कर चनव ह कय. ब ल त ह मगर ज न क ह मस य दसत शयर...

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